अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी अक्सर तब तक पता नहीं चलती, जब तक इसके लक्षण सामने न आने लगें- जैसे भूलने की आदत, सोचने की क्षमता का कम होना या रोजमर्रा के कामों में कठिनाई, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा भविष्यवाणी मॉडल तैयार किया है, जो इन समस्याओं के शुरू होने से लगभग 10 साल पहले ही जोखिम का अनुमान लगा सकता है। यह खोज खास इसलिए है क्योंकि इससे समय रहते सावधानी बरतकर बीमारी की प्रगति को धीमा किया जा सकता है।
यह नया उपकरण
अमेरिका स्थित मेयो क्लिनिक के शोधकर्ताओं ने एक उन्नत उपकरण विकसित किया है, जिसे एक भविष्यवाणी मॉडल की तरह बनाया गया है। यह उपकरण कई महत्वपूर्ण कारकों को एक साथ जोड़कर यह अंदाजा लगाता है कि किसी व्यक्ति में आगे चलकर हल्का संज्ञानात्मक हानि या डिमेंशिया विकसित होने की संभावना कितनी है।
शोध टीम के अनुसार, यह मॉडल भविष्य में व्यक्तिगत देखभाल को बेहतर बनाने में अहम साबित हो सकता है। जैसे कोलेस्ट्रॉल का स्तर देखकर हार्ट अटैक का खतरा समझा जाता है, उसी तरह यह उपकरण भी व्यक्ति-विशेष के मस्तिष्क स्वास्थ्य का अंदाजा लगाने में मदद करेगा।
हालांकि यह अभी एक शोध आधारित उपकरण है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह अल्जाइमर की शुरुआती पहचान में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
अल्जाइमर जैसी बीमारी का अभी कोई पूर्ण इलाज नहीं है, लेकिन शुरुआत में जोखिम का पता चल जाए तो इसकी प्रगति को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है। मेयो क्लिनिक द्वारा विकसित यह नया उपकरण भविष्य में मस्तिष्क स्वास्थ्य की निगरानी को अधिक सटीक और व्यक्तिगत बना सकता है, जिससे लोगों को समय रहते कदम उठाने में मदद मिलेगी।
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