लखनऊ, 9 मई। बैंक कर्मियों की मांग है कि पेंशन में संशोधन कर अपडेशन और विशेष भत्ता जोड़कर पेंशन की गणना की जाये। साथ ही नि: शुल्क स्वास्थ्य बीमा का पुनर्निर्धारण अन्य समस्याओं के निराकरण के साथ अविलंब हो। केन्द्र सरकार और बैंकों के प्रबंधन से की गयी उक्त मांगों की जानकारी पत्रकारों को देते हुए आल इंडिया इंडियन बैंक पेंशनर्स एण्ड रिटायरीज एसोसिएशन ‘एआईआईबीपीएआरए’ उ.प्र.मध्य इकाई के अध्यक्ष एनएन दुबे, प्रांतीय सचिव हरिहर प्रसाद सिंह व संयोजक आलोक कुमार पाण्डेय ने बताया कि इसी सिलसिले में कल 10 मई 26 को संगठन द्वारा त्रिवार्षिक अधिवेशन का आयोजन अम्बर होटल चारबाग में किया जा रहा है।
पेंशनरों की समस्याओं से अवगत कराते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 1995 से प्रभावित पेंशन योजना के अंतर्गत बैंक कर्मचारी व अधिकारीगण के लिए समय-समय पर लागू द्विपक्षीय वेतन समझौते के साथ साथ पेंशनर्स को भी बढ़ाकर पेंशन पुनर्निर्धारण का कार्यान्वयन को लागू किया जाना था, जैसा कि सभी केंद्रीय और सरकारी संस्थाओं व रिज़र्व बैंक में सेवानिवृत्त पेंशनर के लिए यह योजना सरकार द्वारा लागू की गयी है। बैंकों में पेंशनर के लिये सुरक्षित धन पर अर्जित ब्याज से ही पेंशनर्स को संशोधित बढ़ी हुई पेंशन भुगतान करने का प्रावधान है।
बैंकों को इस प्रयोजनार्थ कोई धन जुटाने की व्यवस्था भी नहीं करनी, फिर भी सरकार और इंडियन बैंक एसोसिएशन ‘आईबीए’ के द्वारा बढ़ाकर पेंशन भुगतान में देरी करना पेंशनरों के लिये कष्टप्रद साबित हो रहा है। इसी का दुष्परिणाम है कि आज सेवानिवृत्त चपरासी की पेंशन 15 साल पूर्व सेवानिवृत्त जनरल मैनेजर से अधिक है। इस असमानता के कारण पुराने पेंशनरों को गरीबी और कष्ट में जीवन यापन करने के लिये मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसी समस्याओं का शीघ्र समाधान हो।
उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में चिकित्सा बीमा कराने कीमत में वृद्धि तथा भर्ती होने पर बहुत से दवा खर्च बीमा-के अनुमन्य सीमा प्रतिबंधों के कारण पेंशनर को बहुत अधिक खर्च करना पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान की तुरंत आवश्यकता है। उदाहरण के लिये इंडियन बैंक के पेंशनर को दवा खर्च के लिये प्रति वर्ष चार हजार रुपये का अनुदान मिलता है, जो पेंशनर्स की बढ़ती उम्र के अनुसार तथा बैंक में कार्यरत कर्मियों को मिली सुविधा के अनुरूप तत्काल और बढ़ाने की आवश्यकता है।
संगठन के पदाधिकारियों का कहना था कि उक्त समस्याओं के अतिरिक्त पेंशन में महंगाई भत्ता की विसंगति, स्वास्थ्य बीमा में जीएसटी कर को हटाने की जरूरत, सामूहिक बीमा योजना ‘जीएमआईएसआर’ को लागू करने और पेंशनर्स की शिकायतों के लिये ‘निवारण प्रकोष्ठ’ की स्थापना करने जैसी और मांगे भी लम्बित हैं। जिनपर बैंक प्रबंधन और सरकार द्वारा शीघ्र उचित समाधान होना चाहिए ।
अध्यक्ष एनएन दुबे ने बताया कि कल के अधिवेशन में लखनऊ और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में पेंशनर, जन प्रतिनिधि एवं सम्मानित ग्राहक भी सम्मिलित हो रहे हैं। अधिवेशन में पेंशनर की समस्याओं पर लम्बित मांगों के अतिरिक्त बैंकों में ग्राहक सेवा एवं राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों पर प्रमुखता से विचार किया जाएगा। इस अधिवेशन में संगठन की सेंट्रल कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्मल बारी, महासचिव केके सिंह, उपाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह, आल इंडिया बैंक पेंशनर्स एण्ड रिटायरीज कॉन्फेडरेशन ‘एआईबीपीएआरसी’ और ऑल इंडिया इंडियन बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी अपने विचार प्रकट करेंगे।
