12,000 करोड़ की लागत से तैयार हुआ ‘दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर’ न केवल देवभूमि की दूरी को घटाकर ढाई घंटे करने जा रहा है, बल्कि यह उत्तर भारत के रियल एस्टेट मैप पर निवेश के ‘गोल्डन गेट’ भी खोल रहा है। 213 किमी लंबा यह 6-लेन कॉरिडोर ₹12,000 करोड़ से अधिक की लागत से बना है, जो दिल्ली–देहरादून की यात्रा को 6–7 घंटे से घटाकर लगभग 2.5–3 घंटे कर देगा।
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता 12 किमी लंबा एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर है, साथ ही कई अंडरपास और एनिमल पासेज भी बनाए गए हैं, जिससे विकास के साथ-साथ जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित होगा।
भारत की इंजीनियरिंग का नया प्रतीक
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को भारत की आधुनिक इंजीनियरिंग का शानदार नमूना बताया जा रहा है, जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों का संतुलन दिखता है. प्रधानमंत्री मोदी आज इस ऐतिहासिक परियोजना को राष्ट्र को समर्पित कर उत्तर भारत की कनेक्टिविटी की तस्वीर बदलने जा रहे हैं.
तीन राज्यों के लिए ‘टर्निंग प्वाइंट’
यह एक्सप्रेसवे दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लिए एक बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है. इसके जरिए पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. देहरादून, मसूरी और चारधाम यात्रा आसान होगी. यमुना एक्सप्रेसवे, एनएच और 10 से ज्यादा स्टेट हाईवे से सीधा कनेक्शन है.
क्यों खास है दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे?
210 किलोमीटर लंबा अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे
करीब ₹11,970 करोड़ की लागत
12 किमी लंबा एशिया का सबसे बड़ा ग्रीन एलिवेटेड कॉरिडोर
वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवाजाही: नीचे से हाथी, बाघ, तेंदुआ सहित अन्य जीवों का निर्बाध मूवमेंट
पूरे मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे, सोलर लाइट और हरियाली
ड्रोन उड़ाने पर रोक, चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा
