चुनाव जैसे संवेदनशील सिस्टम में अनुशासन और जवाबदेही सबसे ऊपर मानी जाती है। लेकिन जब यही सिस्टम सीनियर अफसरों के बीच टकराव की वजह बन जाए तो मामला सिर्फ एक मीटिंग तक सीमित नहीं रहता। पश्चिम बंगाल चुनाव की समीक्षा बैठक में जो हुआ उसने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया कि क्या अनुभव और अधिकार के बीच संतुलन बिगड़ रहा है? यूपी कैडर के आईएएस अनुराग यादव और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच हुई तीखी बहस ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल के कूच बिहार दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के जनरल ऑब्जर्वर रहे अनुराग यादव को चुनाव आयोग ने हटा दिया है। बताया गया कि वह एक वर्चुअल मीटिंग में अपने क्षेत्र के बेसिक सवालों का तुरंत जवाब नहीं दे पाए, इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से उनकी बहस हो गई। हालांकि आयोग का कहना है कि उन्हें बहस के कारण नहीं, बल्कि काम में कमी के चलते हटाया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोलकाता में हुई एक हाई-लेवल मीटिंग के दौरान अनुराग यादव की मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से तीखी बहस हो गई। ज्ञानेश कुमार ने अनुराग से कहा “घर जाओ” बताया जा रहा है कि CEC द्वारा पूछे गए सवालों का संतोषजनक जवाब न दे पाने पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। CEC ने कुछ सख्त टिप्पणी कर दी। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान अनुराग यादव ने कथित तौर पर कहा “आप ऐसे बात नहीं कर सकते… जिसके बाद मामला और गरमा गया। इस टकराव के तुरंत बाद चुनाव आयोग ने सख्त कदम उठाते हुए उन्हें ऑब्जर्वर पद से हटा दिया।
कौन हैं IAS अनुराग यादव और क्यों चर्चा में आए?
यूपी कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी अनुराग यादव अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव के बावजूद इस विवाद के बाद सुर्खियों में आ गए हैं। अनुराग यादव 2000 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में प्रधान सचिव स्तर पर तैनात हैं। हाल ही में उन्हें सोशल वेलफेयर और सैनिक कल्याण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इससे पहले वे IT जैसे अहम विभागों में भी काम कर चुके हैं। प्रशासनिक अनुभव और लंबे करियर के चलते उन्हें एक सीनियर और प्रभावशाली अधिकारी माना जाता है।
पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान उन्हें कूच बिहार दक्षिण सीट का जनरल ऑब्जर्वर बनाया गया था। यह भूमिका बेहद अहम होती है क्योंकि ऑब्जर्वर को चुनाव आयोग की ‘आंख और कान’ माना जाता है। ऐसे में क्षेत्र से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी उनके पास होनी चाहिए। लेकिन मीटिंग के दौरान पोलिंग बूथ जैसी बुनियादी जानकारी देने में देरी ने उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए।
वर्चुअल रिव्यू मीटिंग के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने सभी ऑब्जर्वर्स से उनके क्षेत्रों की जानकारी मांगी। जब अनुराग यादव की बारी आई तो वे तुरंत जवाब नहीं दे पाए। इसी दौरान हुई टिप्पणी पर उन्होंने कड़ा ऐतराज जताया और कहा कि उनके 25 साल के अनुभव का सम्मान किया जाना चाहिए। इसके बाद कुछ देर के लिए बैठक में सन्नाटा छा गया। बाद में चुनाव आयोग ने उन्हें ऑब्जर्वर पद से हटा दिया और इसे “कार्य में कमी” का मामला बताया।
